Saturday, August 7, 2010

शोषित और शोषक

स्वानो को मिलता वस्त्र दूध
भूखे बालक अकुलाते हैं
माँ की हड्डी से चिपक ठिठुर
जाड़ों की रात बिताते हैं
युवती के लज्जा वसन बेच
जब ब्याज चुकाए जाते हैं
मालिक तब तेल फुलेलों पर
 पानी सा द्रव्य बहते हैं
-दिनकर

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